क्या भारत सरकार चीन के उत्पादों का बहिष्कार कर सकती है ?

भारत, चीन से व्यापार क्यूं कर रहा है, यह प्रश्न प्रत्येक भारतीय के मन मे जरूर आता होगा, कुछ तो कहते है कि भारत सरकार चीन का समान खरीदने के लिये मना करती है लेकिन खुद ही चीन से चीनी समान को मगांती है, हम स्वंय थोडे चीन से समान खरीदने जाते है और अगर बन्द ही करना है तो सबसे पहले सरकार को चीन के समानों पर पाबन्दी लगा देना चाहिये । यह सवाल सभी भारतीयों के मन मे आते है । आइये जानते है ऐसा क्यो ?

क्या आपको पता है कि प्रत्येक देश अपने व्यापार आयात निर्यात के अनुबन्ध के आधार पर ही व्यापार करते है । विश्व व्यापार संगठन (WTO) का मुख्यालय स्विजरलैण्ड के जिनेवा शहर मे है । विश्व व्यापार संगठन (WTO) मे आज लगभग् 164 देश सदस्य है जिसमे अपना भारत शुरू से ही विश्व व्यापार संगठन (WTO) का सदस्य रहा । WTO का मकसद संरक्षणवाद को खत्म कर भेदभावरहित, पारदर्शी और मुक्त व्यापार व्यवस्था बनाना था ताकि सभी देश एक-दूसरे के साथ बिना किसी बाधा (अत्यधिक टैरिफ या प्रतिबंध) के व्यापार कर सकें। साथ ही व्यापारिक विवादों को हल करने में भी इसे भूमिका निभानी थी। इसलिये विश्व व्यापार संगठन (WTO) बनाया गया।

विश्व व्यापार सगठन के प्रत्येक देशो के मध्य एक अनुबन्ध पत्र पर आधारित नियमो के अन्तर्गत ही व्यापार करना आवश्यक है, कोई देश आयात-निर्यात के लिये अनुबन्ध पत्र के आधार पर ही व्यापार कर सकता है । विश्व व्यापार सगठन का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक देश संरक्षणवादी नीतियो के तहत अर्थव्यावस्था को मजबूत बनाने के लिये आपसी देशो के प्रति शान्ति से व्यापार करने की आपसी साझेदारी भी बनी रहे और व्यापारिक मतभेद न हो ।

भारत और चीन के मध्य आयात-

चीन ने भारत के इलेक्ट्रॉनिक उद्योग की भी कमर तोड़ दी है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण दिवाली के मौके पर घर- घर में इस्तेमाल होने वाली “बिजली की लड़ी” है।इसके अलावा बिजली का लगभग हर सामान भारत के बाजारों में भरा पड़ा है |

कौन-कौन से उत्पाद भारत चीन से आयात करता है (Chinese products imported in India): खिलौने, बिजली उत्पाद, कार और मोटरसाइकिल के कलपुर्जे, दूध उत्पाद, उर्वरक, कम्प्यूटर, एंटीबायोटिक्स दवाई, दूरसंचार और उर्जा क्षेत्र से जुड़े विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादों का आयात भारत करता है

भारत और चीन के मध्य निर्यात-

कौन-कौन से उत्पाद भारत, चीन को निर्यात करता है (Indian Products Exported to China) : कृषि उत्पाद, सूती वस्त्र, हस्तशिल्प उत्पाद, कच्चा लेड, लौह अयस्क,स्टील, कॉपर,टेलीकॉम सामाग्री,तथा अन्य पूंजीगत वस्तुएं इत्यादि .भारत अपने हीरे का 36% चीन को निर्यात करता है।

चीन ने भारत के किस क्षेत्र को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है ? (Which industry is most affected by Chinese Import?)
चीन के द्वारा सबसे ज्यादा नुकसान भारत के खिलौना उद्योग को हुआ है | चाइनीज खिलौनों की लागत इतनी कम है कि कोई भी भारतीय कम्पनी चीन की प्रतियोगिता का मुकाबला करने में असमर्थ है | पिछले साल भारतीय खिलौनों के केवल 20% बाजार पर भारतीय कंपनियों का अधिकार था बाकी के 80% बाजार पर चीन और इटली का कब्ज़ा था | ASSOCHAM के एक अध्ययन के अनुसार पिछले 5 साल में 40% भारतीय खिलौना बनाने वाली कम्पनियां बंद हो चुकी है और 20 % बंद होने की कगार पर हैं|

भारत, चीन के उत्पादों को रोकने के लिए क्या कर सकता है ?

विश्व व्यापार सगठन (WTO) नियमों के कारण भारत चीन के सामान पर प्रत्यक्ष नियंत्रण तो नही लगा सकता लेकिन भारत सरकार चीनी सामान पर “Anti-Dumping Duty” जरूर लगा सकती है। एंटी-डंपिंग शुल्क लागू होने की तिथि से 5 वर्ष के लिये वैध होता है। यह अवधि पूर्ण होने पर इसे WTO के डंपिंग रोधी समझौते (Anti-Dumping Agreement) के अनुच्छेद 11.3 के अनुसार सनसेट समीक्षा के पश्चात् पाँच साल के लिये और बढ़ाया जा सकता है। यह एक प्रकार का शुल्क है जिससे चीनी वस्तुओं की कीमतें बढ़ जायेगीं और भारतीय उत्पादक उनका मुकाबला कर सकेंगे | Anti-Dumping Duty को रोकने और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था में समानता स्थापित करने के लिये लगाया जाता है। यदि चीन के उत्पादक इस शुल्क की वजह से भारत में सामान नही भेजते हैं तो भारतीय उत्पादक उन्हें भारत में बनाना शुरू करेंगे जिससे हमारे देश में रोजगारों का सृजन होगा और हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी |

भारतीय बाजार में जितनी बड़ी मात्रा में चाइनीज सामान मिलता है उससे तो सिर्फ यह लगता है कि चीन के उद्योगपतियों ने भारत में मनाये जाने वाले हर त्यौहार, उत्सव, समाज, आयु वर्ग, विभिन्न प्रदेशों में इस्तेमाल होने वालों समानों की लिस्ट बनायी होगी फिर उत्पादन शुरू किया होगा तभी तो हमारे शादी समारोह से लेकर जन्मदिन, होली, दिवाली, रक्षाबंधन सभी अवसरों के लिए ‘मेड इन चाइना’ सामान सस्ते दामों पर हर दुकान और नुक्कड़ पर मिलता है|

अब हालातों को देखते हुए इतना अवश्य कहा जा सकता है कि चीन के उत्पादों को भारत में घुसने से भारत सरकार नही बल्कि भारत के लोग अवश्य ही रोक सकते हैं | हम भारतीयों को “Think Globally and Act Locally” वाली विचारधारा को अपनाना ही होगा और अधिकांशतः हमे अपने ही देश की वस्तुओ का उपयोग करना चाहिये, दूसरे अन्य किसी भी देश का सामान कम से कम उपयोग मे लाना होगा, तभी हमारे देश के हाथ मजबूत होंगे ।

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