Hindu Marriage Act (HMA)

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Permanent alimony and maintenance (स्थायी निर्वाहिका और भरण-पोषण)

हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा-25 के अन्तर्गत स्थायी निर्वाहिका और भरण पोषण (Permanent alimony and maintenance) को बताता है । स्थायी निर्वाहिका और भरण पोषण पति अथवा पत्नी विवाह विखण्डित होने के उपरान्त अथवा पहले अपनी जीविका चलाने हेतु पति अथवा पत्नी दूसरे पक्षकार से न्यायोच्चित ढंग से न्यायालय व्दारा दिलाया जा सकता है । Maintenance …

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Legitimacy of children of void and voidable marriages (शून्य एवंम् शून्यकरणीय विवाह के संतानों की धर्मजता)

हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा-16 मे बताया गया है कि शून्य और शून्य विवाह वाले बच्चों की विरासत के बारे मे बताया गया है कि शून्य विवाह विधि की दृष्टि में विवाह नही माना जाता है, परन्तु विवाह अधिनियम 1955 की धारा-16, से उत्पन्न संतानों वैध घोषित करती है । अतः हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 …

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हिन्दू विवाह मे न्यायिक पृथक्करण (Judicial Separation)

हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा-10 के अन्तर्गत विवाह दम्पत्यों के विवाह मे न्यायिक पृथक्करण के अधिकारों को बताया गया है हिन्दू विवाह अधिनियम के अन्तर्गत हिन्दू विवाह दोनो का ही पवित्र कर्तव्य है कि एक-दूसरे को साहचर्य प्रदान करें, परन्तु कभी कभी ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं, जब पति-पत्नी का एक साथ रहना सम्भव …

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Hindu Marriage Act-9 (दांपत्य अधिकारों का प्रतिस्थापन)

Restitution of Conjugal Rights (दाम्पत्य अधिकारों का पुनः स्थापन) हिन्दू विवाह अधिनियम के अन्तर्गत धारा-9 मे दाम्पत्य अधिकारों का पुनः स्थापन बताया गया है । न्यायालय मे एक अर्जी के आधार पर दाम्पत्य को पुनः दाम्पत्य साथ रहने अथवा मूल कारणों को प्रमाणित करने के आधार पर पुनः दाम्पत्य जीवन का आरम्भ किया जा सकता …

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Hindu Marriage Act-5 (हिन्दू विवाह अधिनियम धारा-5)

हिन्दू विवाह अधिनियम धारा-5 के अन्तर्गत हिन्दू विवाह के प्रमुख शर्तो के आधार पर विवाह मान्य अथवा अमान्य घोषित किया जाता है । हिन्दू विवाह मे प्रमुख शर्ते दोनो पक्षकारो पर लागू होता है, हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा-5 की शर्तो के आधार पर विवाह ही विवाह संपन्न होने पर ही विवाह मान्य होगा । …

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Hindu Marriage Act 14-15 (हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा- 14 और 15)

हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा- 14 के अन्तर्गत विवाह को एक वर्ष के भीतर तलाक देने के लिए कोई याचिका प्रस्तुत नही की जा सकती है । यह अधिनियम केवल यह बताता है कि एक वर्ष के भीतर हिन्दू विवाह भंग नही किया जा सकता है । हिन्दू विवाह अधिनियम के अन्तर्गत हिन्दू विवाह मे …

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