How to make a firm फर्म कैसे बनाते है, और कितने प्रकार से बनती है?| साझेदारी फर्म किसे कहते है, साथ ही इससे जुडी पूर्ण जानकारी | What is partnership firm? | साझेदारी विलेख एवंम् पार्टनर सेवानिवृत्ति प्रारूप हिंदी और अंग्रेजी मे | partnership deed and Partner Retirement deed format in hindi and english.|type of Company

दोस्तो नमस्कार स्वागत है आपका अपने Mylegallaw.com ब्लाग मे,
आज हम आपको फर्म से सम्बन्धित महत्वपूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से देगें। इस लेख मे आज हम आपको Firm कैसे बनाते है, क्या क्या ध्यान देना आवश्यक हैं, फर्म बनाने के लिये साथ ही साझेदारी फर्म (Partnership Firm) क्या होती है, कैसे बनानी चाहिये और क्या-क्या शर्ते होना जरूरी है एवंम् इसके साथ ही (Partnership deed Sample format) भी देंगें। हिन्दी एवंम् अंग्रेजी दोनो मे- तो आइये जानते है फर्म किसे कहते है?

फर्म (firm meaning) किसे कहते है?

वैसे तो हम सभी लोगो ने सुना होगा, कि फर्म एक तरह से व्यापार करने वाली संस्था को कहते है जो देश-विदेश मे व्यापार करती है, फर्म को हम सभी हिन्दी मे व्यापारिक फर्म भी कह सकते है, अर्थात् ऐसी कोई व्यापारिक प्रतिष्ठान जिसका व्यवसाय अनेक देशों में मजबूती से फैला हो।

फर्म के अनेक अर्थ जैसे हम उसे Concern, Firm, Trade और व्यापारिक प्रतिष्ठान भी बोलते है । लेकिन क्या हम जानते है, कि फर्म भी कई प्रकार से बनायी जाती है।

फर्म (Firm) के प्रकार-

1. प्रोपराइटरशिप (Proprietorship Firm)- एक प्रोपराइटर मालिक होता है ।
2. पार्टनरशिप (Partnership Firm)- दो या दो से अधिक मालिक होते सकते है, लेकिन अधिकतम 50 होंगे।
3. हिंदू अनडिवाइडेड फैमली (HUF Firm)- एकल फैमली, अर्थात् पति, पत्नी और बच्चे।
4. एसोसिएशन ऑफ पार्टनर्स (AOP Firm)- दो या दो से अधिक मालिक होते है ।

साझेदारी फर्म (How to make Partnership firm) किसे कहते है और कैसे बनाते हैं?

किसी व्यापारिक वह संस्था जिसमे दो अथवा दो से अधिक व्यक्ति मिलकर किसी व्यवसाय सुचारू रूप से लाभ और हानि हेतु एक व्यवसाय को शुरू करने और चलाने के लिए एक समझौते (agreement) की जरूरत होती है इसमें भाग लेने वाले लोग साझेदार (partner) होते हैं और इस प्रकार वे फर्म को एक साझेदारी फर्म (Partnership firm) बनती है, और इसे ही Partnership firm कहा जाता है।

साझेदारी विलेख क्या है? (What is partnership deed)

साझेदारी फर्म बनाने के लिये फर्म के प्रत्येक सदस्य को हर मामले जैसे- (लाभ-हानि) दोनो मे बराबरी की हिस्सेदारी होती है। इसके लिये एक तरह से सभी के मध्य एक करारनामा जारी होता है, जिसे हम हिन्दी मे साझेदारी विलेख (Partnership Deed) कहते है। इस विलेख में प्रत्येक पार्टनर्स लिखित रूप से आपसी सहमति अथवा ईमानदारी से सभी शर्तों को स्वीकार कर पार्टनरशिप फर्म का निर्माण करते है ।

साझेदारी विलेख कैसे बनाते है? (How to make partnership deed)

साझेदारी विलेख (Partnership deed) के मुख्य बिंदु-
1.पार्टनरशिप फर्म में सबसे सभी पार्टनरों का पूरा नाम, पता अंकित होता है।
2. फर्म में किस प्रकार का और किस वस्तु का व्यापार किया जाएगा, यह भी अंकित होना आवश्यक है।
3. फर्म किस स्थान पर रजिस्टर्ड है और कहा कहा गोदाम अथवा ब्रांच है, यह भी अंकित होना, बहुत ही आवश्यक है।
4. फर्म, Partnership में कब तक चलेगी। यदि आपको कम समय के लिए साथ व्यापार करना है, तो यह भी होना आवश्यक है, जिससे समय आने पर कोई पार्टनर बेइमानी न कर सके।
5. Partnership फर्म में एक महत्वपूर्ण बात का होना बहुत ही आवश्यक है, कि किस पार्टनर ने कितना Capital Money लगाई है, साथ ही प्रत्येक पार्टनर्स की लाभ और हानि की भागीदारी कितनी क्या रहेगी ।
6. प्रत्येक पार्टनर्स की क्या जिम्मेदारी और क्या दायित्व होंगे, यह सभी प्वाइंट्स होना बहुत जरुरी है।
7. प्रत्येक पार्टनर्स की लाभ एवम् सैलरी अथवा intrest कैसे क्या मिलेगा, यह भी होना बहुत जरूरी है।
8. प्रत्येक पार्टनर्स की शर्ते, बैंक रख-रखाव और उचित पुस्तकें, बैलेंसशीट और फर्म लेखाजोखा के प्रति कैसे क्या होंगे, यह भी अंकित होना जरूरी है।
9. इसके साथ बैंक चलाने के आपसी सहमति अथवा किसे क्या पावर देना, यह भी अंकित होना जरूरी है।
10. प्रत्येक साझेदार का प्रवेश, सेवानिवृत्ति और मृत्यु के समय सद्भावना के आधार पर गणना जैसे प्वाइंट्स का होना भी जरूरी है।
11. अंतिम बिंदु किस पार्टनर को हटाने और जोड़ने अथवा रिटायर्ड करने, साझेदारों के मध्य विवादो के मामलों जैसे प्वाइंट्स का होना भी जरूरी है।

(Partnership deed) साझेदारी विलेख में क्या क्या देखना आवश्यक हैं-

पार्टनरशिप डीड बनाते समय हमे बहुत सी सावधानियां बरतनी चाहिए, क्योंकि भगवान न करे कल किसी के साथ ऐसा हो जाए कि कोई पार्टनर आपके हक को मार दे या बेईमानी कर ले, इसलिए पार्टनरशिप डीड को अच्छी तरह से सोच समझ कर ही जुड़े। अब बात करते ऐसी क्या सावधानियां रखनी चाहिए-
Partnership deed बनाते समय प्रत्येक पार्टनर्स ईमानदार होना बहुत आवश्यक है, तभी साझेदारी चलेगी।
प्रत्येक साझेदार अपने कारोबार को बढ़ाने के साथ साथ अपने कर्तव्यों का निर्वाहन ढंग से ही करे, ऐसा करार डीड में भी होना आवश्यक है।
साझेदार आपसी मतभेद वाला व्यक्ति न हो, तो ही साझेदारी करे।
साझेदारी फर्म में किसी साझेदार को जोड़ने, हटाने अथवा निष्कासित करने के प्वाइंट भी होना आवश्यक है।
सबसे मुख्य बिंदु यह है कि firm को पार्टनरशिप एक्ट के अनुसार साझेदारी फर्म को पंजीकृत करा ले, क्योंकि पार्टनरशिप फर्म में विवाद की स्थिति उत्पन्न होनें पर अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इसलिए हमेशा लिखित पार्टनरशिप डीड तैयार करना और फर्म को रजिस्ट्रार ऑफ फर्म के साथ पंजीकृत करना उचित होता है।।

पार्टनरशिप डीड का पंजीकरण कैसे करे? (How to register partnership deed)

भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 द्वारा शासित होती है। पार्टनरशिप एक्ट के अनुसार साझेदारी फर्म को पंजीकृत करना वैकल्पिक है, अर्थात पार्टनर अपनी पार्टनरशिप को पंजीकृत कर सकते हैं या नहीं भी कर सकते हैं। परन्तु फर्म का रजिस्ट्रेशन न होनें पर विवाद की स्थिति उत्पन्न होनें पर अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इसलिए हमेशा लिखित पार्टनरशिप डीड तैयार करना और फर्म को रजिस्ट्रार ऑफ फर्म के साथ पंजीकृत करना उचित होता है।
भारतीय साझेदारी अधिनियम 1932 के अंतर्गत यदि साझेदारों एवम् किसी अन्य दूसरे व्यक्ति के मध्य विवाद होता है, तो जब तक आपकी फर्म साझेदारी अधिनियम के अंतर्गत रजिस्टर्ड नही होगी, तब तक वह कोई लीगल प्रकिया नही कर सकती है।इसलिए रजिस्टर्ड करना बहुत ही आवश्यक है।

साझेदारी फर्म रजिस्टर्ड कराने के लिए प्रत्येक जिले में रजिस्ट्रार कार्यालय बने हुए हैं वहां प्रत्येक पार्टनर्स लिखित डीड, अपनी आईडी और शपथपत्र ले जाकर सेवा शुल्क जमा कर रजिस्टर्ड करा सकते है।
साझेदारी फर्म का नाम, सभी पार्टनर्स का नाम और पता, व्यवसाय का स्थान, साझेदारी की अवधि, पार्टनर्स के शामिल होने की तिथि, बिजनेस शुरू करने की तिथि।
पार्टनरशिप डीड की विधिवत हस्ताक्षरित प्रति (जिसमें सभी नियम और शर्तें शामिल हैं) को रजिस्ट्रार के साथ भरना होगा।
आवश्यक शुल्क जमा करें और शुल्क का भुगतान करें।
एक बार जब रजिस्ट्रार आवेदन को मंजूरी दे देता है, तो फर्म को रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा और रजिस्ट्रार निगमन का प्रमाण पत्र भी जारी करेगा। इस तरह पंजीकरण प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और आपकी फर्म को कानूनी मान्यता मिल जाएगी।

पार्टनरशिप डीड प्रारूप (Partnership deed Formet)

Partner Retirement Deed Formet (पार्टनर सेवा निवृत्ति प्रारूप)

इसी प्रकार से कंपनी एक्ट के तहत कंपनी भी कई प्रकार से होती है, तो आइए जानते हैं-

1. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी (Private Ltd Company)- इस कंपनी में सभी मालिक एक तरह से कंपनी के नौकर ही होते है, जिन्हे हम डायरेक्टर कहते है, इस कंपनी में उन्ही डायरेक्टरों के ही शेयर होते है।
2. पब्लिक लिमिटेड कंपनी (Public Ltd Company)- इस कंपनी में सभी मालिक कंपनी के शेयर्स खदीदने वाले वह आम पब्लिक होती है, जिन्होंने कंपनी के शेयर्स को खरीदा साथ ही जिसके पास कंपनी के सबसे ज्यादा शेयर्स होंगे वह ही main डायरेक्टर होते है। ऐसी कंपनियों में डायरेक्टर्स बदलते रहते हैं।
3. लिमिटेड लैबिलिटीज कंपनी (LLP Company)- यह कंपनी एक्ट के तहत ही रजिस्टर होगी। यह भी एक सीमित देयता साझेदारी (LLP) एक साझेदारी है जिसमें कुछ या सभी भागीदारों (क्षेत्राधिकार के आधार पर) की सीमित देयता होती है। इसलिए यह भागीदारी और निगमों के तत्वों को प्रदर्शित करता है। एक एलएलपी में एक साथी दूसरे भागीदारों के कदाचार या लापरवाही के लिए जिम्मेदार या उत्तरदायी नहीं है। यह एक असीमित साझेदारी का एक महत्वपूर्ण अंतर है।

हमारा प्रयास फर्म कैसे बनाए, पार्टनरशिप फर्म कैसे बनाए, और कंपनी के प्रकार की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
धन्यवाद

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