fbpx

आईपीसी की धारा 183 | लोक-सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा सम्पत्ति लिये जाने का प्रतिरोध | IPC Section- 183 in hindi | Resistance to the taking of property by the lawful authority of a public servant.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 183 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 183? साथ ही हम आपको IPC की धारा 183 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 183 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 183 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी लोक-सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा किसी सम्पत्ति के ले लिये जाने का प्रतिरोध यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए करेगा कि वह ऐसा लोक सेवक है तो वह धारा 183 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 183 के अनुसार

लोक-सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा सम्पत्ति लिये जाने का प्रतिरोध-

जो कोई किसी लोक-सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा किसी सम्पत्ति के ले लिये जाने का प्रतिरोध यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए करेगा कि वह ऐसा लोक सेवक है, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।

Resistance to the taking of property by the lawful authority of a public servant-
Whoever offers any resistance to the taking of any property by the lawful authority of any public servant, knowing or having reason to believe that he is such public servant, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to six months, or with fine which may extend to one thousand rupees, or with both.

लागू अपराध 

लोक-सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा सम्पत्ति लिये जाने का प्रतिरोध।
सजा- छह मास के लिए कारावास या एक हजार रुपए का जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 183 के अंतर्गत जो कोई किसी लोक-सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा किसी सम्पत्ति के ले लिये जाने का प्रतिरोध यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए करेगा कि वह ऐसा लोक सेवक है, तो वह छह के लिए कारावास और जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 183 के अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजासंज्ञेयजमानतविचारणीय
लोक-सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा सम्पत्ति लिये जाने का प्रतिरोध।छह मास के लिए कारावास या एक हजार रुपए का जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 183 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

Leave a Comment