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आईपीसी की धारा 184 | लोक-सेवक के प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गयी सम्पत्ति के विक्रय में बाधा उपस्थित करना | IPC Section- 184 in hindi | Obstructing sale of property offered for sale by authority of public servant.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 184 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 184? साथ ही हम आपको IPC की धारा 184 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 184 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 184 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई ऐसी किसी सम्पत्ति के विक्रय में, जो ऐसे लोक-सेवक के नाते किसी लोक-सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिये प्रस्थापित की गई हो, साशय बाधा डालेगा, तो वह व्यक्ति धारा 184 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 184 के अनुसार-

लोक-सेवक के प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गयी सम्पत्ति के विक्रय में बाधा उपस्थित करना-

जो कोई ऐसी किसी सम्पत्ति के विक्रय में, जो ऐसे लोक-सेवक के नाते किसी लोक-सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिये प्रस्थापित की गई हो, साशय बाधा डालेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।

Obstructing sale of property offered for sale by authority of public servant-
Whoever intentionally obstructs any sale of property offered for sale by the lawful authority of any public servant, as such, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to one month, or with fine which
may extend to five hundred rupees, or with both.

लागू अपराध 

लोक-सेवक के प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गयी सम्पत्ति के विक्रय में बाधा उपस्थित करना।
सजा- एक मास के लिए कारावास या पांच सौ रुपया जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 184 के अंतर्गत जो कोई ऐसी किसी सम्पत्ति के विक्रय में, जो ऐसे लोक-सेवक के नाते किसी लोक-सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिये प्रस्थापित की गई हो, साशय बाधा डालेगा, तो वह एक मास के लिए कारावास और जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 184 के अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजासंज्ञेयजमानतविचारणीय
लोक-सेवक के प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गयी सम्पत्ति के विक्रय में बाधा उपस्थित करना।एक मास के लिए कारावास या पांच सौ रुपया जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 184 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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