आईपीसी की धारा 413 | चुराई हुई संपत्ति का अभ्यासत: व्यापार करना | IPC Section- 413 in hindi| Habitually dealing in stolen property.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 413 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 413 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 413 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 413 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई ऐसी सम्पत्ति, जिसके सम्बन्ध में वह यह जानता है, या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई सम्पत्ति है, अभ्यासत: प्राप्त करेगा, या अभ्यासत: उसमें व्यवहार करेगा, तो वह धारा 413 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 413 के अनुसार

चुराई हुई संपत्ति का अभ्यासत: व्यापार करना-

जो कोई ऐसी सम्पत्ति, जिसके सम्बन्ध में वह यह जानता है, या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई सम्पत्ति है, अभ्यासत: प्राप्त करेगा, या अभ्यासत: उसमें व्यवहार करेगा, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Habitually dealing in stolen property-
Whoever habitually receives or deals in property which he knows or has reason to believe to be stolen property, shall be punished with imprisonment for life, or with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

चुराई हुई संपत्ति का अभ्यासत: व्यापार करना।
सजा- आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 413 के अंतर्गत जो कोई ऐसी सम्पत्ति, जिसके सम्बन्ध में वह यह जानता है, या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई सम्पत्ति है, अभ्यासत: प्राप्त करेगा, या अभ्यासत: उसमें व्यवहार करेगा, तो वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 413 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नहीं मिल सकेगी।

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हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 413 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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