आईपीसी की धारा 422 | ऋण को लेनदारों के लिये उपलब्ध होने से बेईमानी से या कपटपूर्वक निवारित करना | IPC Section- 422 in hindi| Dishonestly or fraudulently preventing debt being available for creditors.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 422 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 422 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 422 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 422 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे जो कोई किसी ऋण का या मांग का, जो स्वयं उसको या किसी अन्य व्यक्ति को शोध्य हो, अपने या ऐसे अन्य व्यक्ति के ऋणों को चुकाने के लिये विधि के अनुसार उपलभ्य होना कपटपूर्वक या बेईमानी से निवारित करेगा, तो वह धारा 422 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 422 के अनुसार

ऋण को लेनदारों के लिये उपलब्ध होने से बेईमानी से या कपटपूर्वक निवारित करना-

जो कोई किसी ऋण का या मांग का, जो स्वयं उसको या किसी अन्य व्यक्ति को शोध्य हो, अपने या ऐसे अन्य व्यक्ति के ऋणों को चुकाने के लिये विधि के अनुसार उपलभ्य होना कपटपूर्वक या बेईमानी से निवारित करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।

Dishonestly or fraudulently preventing debt being available for creditors-
Whoever dishonestly or fraudulently prevents any debt or demand due to himself or to any other person from being made available according to law for payment of his debts or the debts of such other person, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

अपराधी का अपने को शोध्य ऋण या मांग का लेनदारों के लिये उपलब्ध किया जाना कपटपूर्वक निवारित करना।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 422 के अंतर्गत जो कोई किसी ऋण का या मांग का, जो स्वयं उसको या किसी अन्य व्यक्ति को शोध्य हो, अपने या ऐसे अन्य व्यक्ति के ऋणों को चुकाने के लिये विधि के अनुसार उपलभ्य होना कपटपूर्वक या बेईमानी से निवारित करेगा, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 422 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

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हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 422 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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