आईपीसी की धारा 433 | किसी दीपगृह या समुद्री चिन्ह को नष्ट करके, हटाकर या कम उपयोगी बनाकर रिष्टि | IPC Section- 433 in hindi| Mischief by destroying, moving or rendering less useful a lighthouse or sea-mark.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 433 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 433 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 433 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 433 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे जो कोई किसी दीपगृह को या समुद्री चिह्न के रूप में उपयोग में आने वाले अन्य प्रकाश के, या किसी समुद्री चिह्न या बोया या अन्य चीज के, जो नौ-चालकों के लिये मार्ग प्रदर्शन के लिये रखी गयी हो, नष्ट करने या हटाने द्वारा अथवा कोई ऐसा कार्य करने द्वारा, जिससे कोई ऐसा दीपगृह, समुद्री चिह्न, बोया या, पूर्वोक्त जैसी अन्य चीज नौचालकों के लिये मार्ग प्रदर्शक के रूप में कम उपयोगी बन जाये, रिष्टि करेगा, तो वह धारा 433 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 433 के अनुसार

किसी दीपगृह या समुद्री चिन्ह को नष्ट करके, हटाकर या कम उपयोगी बनाकर रिष्टि–

जो कोई किसी दीपगृह को या समुद्री चिह्न के रूप में उपयोग में आने वाले अन्य प्रकाश के, या किसी समुद्री चिह्न या बोया या अन्य चीज के, जो नौ-चालकों के लिये मार्ग प्रदर्शन के लिये रखी गयी हो, नष्ट करने या हटाने द्वारा अथवा कोई ऐसा कार्य करने द्वारा, जिससे कोई ऐसा दीपगृह, समुद्री चिह्न, बोया या, पूर्वोक्त जैसी अन्य चीज नौचालकों के लिये मार्ग प्रदर्शक के रूप में कम उपयोगी बन जाये, रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

Mischief by destroying, moving or rendering less useful a lighthouse or sea-mark-
Whoever commits mischief by destroying or moving any light-house or other light used as a sea-mark, or any sea-mark or buoy or other thing placed as a guide for navigators, or by any act which renders any such light-house, sea-mark. buoy or other such thing as aforesaid less useful as a guide for navigators, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

किसी दीपगृह या समुद्री चिन्ह को नष्ट करने या हटाने या कम उपयोगी बनाने अथवा किसी मिथ्या प्रकाश को प्रदर्शित करने द्वारा रिष्टि।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 433 के अंतर्गत जो कोई किसी दीपगृह को या समुद्री चिह्न के रूप में उपयोग में आने वाले अन्य प्रकाश के, या किसी समुद्री चिह्न या बोया या अन्य चीज के, जो नौ-चालकों के लिये मार्ग प्रदर्शन के लिये रखी गयी हो, नष्ट करने या हटाने द्वारा अथवा कोई ऐसा कार्य करने द्वारा, जिससे कोई ऐसा दीपगृह, समुद्री चिह्न, बोया या, पूर्वोक्त जैसी अन्य चीज नौचालकों के लिये मार्ग प्रदर्शक के रूप में कम उपयोगी बन जाये, रिष्टि करेगा, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 433 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

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हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 433 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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