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आईपीसी की धारा 179 | प्रश्न करने के लिए प्राधिकृत लोक सेवक का उत्तर देने से इन्कार करना | IPC Section- 179 in hindi | Refusing to answer public servant authorised to question.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 179 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 179? साथ ही हम आपको IPC की धारा 179 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 179 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 179 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी लोक-सेवक से किसी विषय पर सत्य कथन करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, ऐसे लोक सेवक द्वारा उस विषय के बारे में उससे पूछे गये किसी प्रश्न का उत्तर देने से इन्कार करेगा तो वह व्यक्ति धारा 179 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 179 के अनुसार-

प्रश्न करने के लिए प्राधिकृत लोक सेवक का उत्तर देने से इन्कार करना—

जो कोई किसी लोक-सेवक से किसी विषय पर सत्य कथन करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, ऐसे लोक सेवक की वैध शक्तियों के प्रयोग में उस लोक-सेवक द्वारा उस विषय के बारे में उससे पूछे गये किसी प्रश्न का उत्तर देने से इन्कार करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Refusing to answer public servant authorised to question
Whoever, being legally bound to state the truth on any subject to any public servant, refuses to answer any question demanded of him touching that subject by such public servant in the exercise of the legal powers of such public servant, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to six months, or with fine which may extend to one thousand rupees, or with both.

लागू अपराध 

सत्य कथन करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए प्रश्नों के उत्तर देने से इन्कार करना।
सजा- छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और अध्याय 26 के उपबन्धो के अधीन रहते हुये वह न्यायालय जिसमे अपराध किया गया है या अपराध न्यायालय मे नही किया गया है तो कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 179 के अंतर्गत जो कोई सत्य कथन करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए भी लोक सेवक द्वारा उस विषय के बारे में उससे पूछे गये किसी प्रश्न का उत्तर देने से इन्कार करेगा, तो वह छह मास के लिए सदा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 179 के अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजासंज्ञेयजमानतविचारणीय
सत्य कथन करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए प्रश्नों के उत्तर देने से इन्कार करना।छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयअध्याय 26 के उपबन्धो के अधीन रहते हुये वह न्यायालय जिसमे अपराध किया गया है या अपराध न्यायालय मे नही किया गया है तो कोई भी मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 179 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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