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आईपीसी की धारा 194, मृत्यु से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्ध कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना | IPC Section-194 in hindi | Giving or fabricating false evidence with intent to procure conviction of capital offence.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 194 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 194? साथ ही हम आपको IPC की धारा 194 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 194 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम आपको महत्वपूर्ण धारा के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। हम में बहुत से लोगो को नहीं पता होता हैं कि यदि कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को मृत्यु जैसे अपराध में दण्ड से बचने या बचाने के लिए मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करते है या मिथ्या साक्ष्य जारी करते है तो यह धारा उन अपराधियों के लिए है जो जानबूझकर किसी अपराधी को बचाने के लिए गलत साक्ष्य का सहारा लेकर अपराधी को बचाने का प्रयास करता है, तो वह धारा 194 के अंतर्गत अपराधी होंगा ।

आईपीसी की धारा 194 के अनुसार-

मृत्यु से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्ध कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना-

जो कोई भारत में तत्समय प्रवृत्त विधि के द्वारा मृत्यु से दंडनीय अपराध के लिए किसी व्यक्ति को दोषसिद्ध कराने के आशय से या संभाव्यतः तद्द्वारा दोषसिद्ध कराएगा, यह जानते हुए, मिथ्या साक्ष्य देगा या गढ़ेगा, वह आजीवन कारावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि 10 वर्ष तक कि हो सकेगी, दंडित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।

Giving or fabricating false evidence with intent to procure conviction of capital offence-

Whoever gives or fabricates false evidence, intending thereby to cause, or knowing it to be likely that he will thereby cause, any person to be convicted of an offence which is capital by the law for the time being in force in India shall be punished with imprisonment for life, or with rigorous imprisonment for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

यदि निर्दोष व्यक्ति एतद्द्वारा दोषसिद्ध किया जाये और उसे फांसी दी जाए – यदि कोई निर्दोष व्यक्ति को ऐसे मिथ्या साक्ष्य के परिणामस्वरूप दोषसिद्ध किया जाए और उसे फांसी दे दी जाए, तो उस व्यक्ति को, जो मिथ्या साक्ष्य देगा, या तो मृत्युदंड या एतस्मिन् पूर्व वर्णित दण्ड दिया जाएगा ।

लागू अपराध

1.किसी व्यक्ति को मृत्यु से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्ध कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना।
सजा– आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना भी या दोनों हो सकते है ।
2. यदि निर्दोष व्यक्ति उसके द्वारा दोषसिद्ध किया जाता है और उसे फांसी दे दी जाती है ।
सजा– मृत्यु या आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना भी या दोनों हो सकते है ।
यह एक अजमानती, संज्ञेय अपराध है और सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

जो कोई किसी ऐसे अपराधी व्यक्ति को मृत्युदंड जैसे दण्ड अपराध के लिए दोषसिद्ध कराने के आशय से झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करता है, या बनाता है तो आईपीसी धारा 194 के अंतर्गत अपराधी होगा, जिसे आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना या फिर दोनों भी हो सकते हैंइसी तरह से यदि निर्दोष व्यक्ति उसके द्वारा दोषसिद्ध किया जाता है और उसे फांसी दे दी जाती है आईपीसी धारा 194 के अंतर्गत अपराधी होगा, जिसे मृत्युदंड या आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना या फिर दोनों भी हो सकते हैं ।

जमानत (Bail) का प्रावधान

यदि कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को मृत्यु जैसे अपराध में दण्ड से बचने या बचाने के लिए मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करते है या मिथ्या साक्ष्य जारी करते है वह भी दंडनीय होगा। यह एक संज्ञेय अपराध है, और साथ ही यह अपराध की जमानतीय नहीं है। इसलिये जमानत मिलनी बहुत मुश्किल होगी।

अपराधसजासंज्ञेयजमानतविचारणीय
किसी व्यक्ति को मृत्यु से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्ध कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना।आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना भी या दोनोंसंज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय
यदि निर्दोष व्यक्ति उसके द्वारा दोषसिद्ध किया जाता है और उसे फांसी दे दी जाती है ।मृत्यु या आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना भी या दोनोंसंज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय

हमारा प्रयास धारा 194 की पूर्ण जानकारी आप तक प्रदान करने का है, अगर आपके मन में कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।
धन्यवाद

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